चंबा के चौगान में सोमनाथ का 'चमत्कार': 1000 साल पुराने दिव्य अवशेषों का हुआ संगम; जानें देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों का अनसुना रहस्य!

चंबा के चौगान में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के 1000 साल पुराने दिव्य अवशेष, News88 Network


रिपोर्ट: News88 Network डेस्क चंबा, 1 अप्रैल 2026: शिव की नगरी चंबा का ऐतिहासिक चौगान बुधवार को एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक पुनरुत्थान का साक्षी बना। करीब 1000 वर्ष पूर्व जब राजा साहिल वर्मन ने चंबा रियासत की नींव रखी थी, लगभग उसी कालखंड में सोमनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग पर हो रहे हमलों के बीच जिन दिव्य अवशेषों को सुरक्षित बचाया गया था, वे आज जन-दर्शन के लिए चंबा की धरा पर पहुंचे।

नियति का अद्भुत संयोग

चंबा और सोमनाथ News88 Network के विशेष विश्लेषण के अनुसार, चंबा के प्रसिद्ध लोक भजन "शिव कैलाशों के वासी" में जिस पहले 'डेरे' (पड़ाव) का वर्णन है, वह यही चौगान है। आज सदियों बाद सोमनाथ के पावन अवशेषों का यहाँ पहुँचना एक दैवीय संयोग है। द आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया।

द आर्ट ऑफ लिविंग के दिव्य सत्संग में भक्ति संगीत और वेद मंत्रोच्चारण, चंबा चौगान में सोमनाथ यात्रा, News88 Network


भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का 'पावन रहस्य'

सोमनाथ के इन अवशेषों के चंबा आगमन के पावन अवसर पर, आइए जानते हैं भारत के उन 12 ज्योतिर्लिंगों का रहस्य जहाँ महादेव स्वयं ज्योति स्वरूप में विराजमान हैं:

-सोमनाथ (गुजरात): यह पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग है। इसका रहस्य यह है कि यहाँ चंद्रमा ने स्वयं महादेव की स्थापना कर अपने क्षय रोग से मुक्ति पाई थी।

-मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश): यहाँ शिव और शक्ति (पार्वती) दोनों ज्योति स्वरूप में एक साथ विराजमान हैं, जो दुर्लभ है।

-महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश): उज्जैन का यह ज्योतिर्लिंग 'दक्षिणमुखी' है, जिसे तंत्र साधना और अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

-ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश): नर्मदा के तट पर स्थित यह स्थान प्राकृतिक रूप से 'ॐ' की आकृति बनाता है।-

-केदारनाथ (उत्तराखंड): पांडवों को दर्शन देने के लिए महादेव यहाँ 'बैल' के कूबड़ के रूप में प्रकट हुए थे।

-भीमाशंकर (महाराष्ट्र): सह्याद्री पर्वत पर स्थित, जहाँ महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया था।

-काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश): मान्यता है कि प्रलय के समय महादेव इस नगरी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते हैं।

-त्रयंबकेश्वर (महाराष्ट्र): यहाँ एक ही लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की मूर्तियाँ स्थापित हैं।

-वैद्यनाथ (झारखंड): रावण ने अपने दस सिर काटकर महादेव को अर्पित किए थे, जिसके बाद शिव ने यहाँ 'वैद्य' बनकर उसे पुनर्जीवित किया। 

-नागेश्वर (गुजरात): दारुकावन में स्थित, जहाँ शिव ने अपने भक्त सुप्रिय की रक्षा के लिए असुरों का नाश किया था।

-रामेश्वरम (तमिलनाडु): स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना कर रावण पर विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था। 

-घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र): अंतिम ज्योतिर्लिंग, जो करुणा का प्रतीक है और भक्तों के सभी संकट हर लेता है।

चंबा के चौगान में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा के दौरान सभा में बैठे श्रद्धालु और जनसैलाब, News88 Network Report


10 दिनों तक देवभूमि में बहेगी शिव-भक्ति की बयार

आर्ट आ‌फ लिविंग के मीडिया प्रबंधक मनुज शर्मा ने बताया कि स्वामी वीरूपाक्ष की देखरेख में शुरू हुई यह 10 दिवसीय हिमाचल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा अब प्रदेश के अन्य जिलों को पावन करेगी। चंबा में भव्य शुभारंभ के बाद, भक्ति का यह कारवां दो अप्रैल को कांगड़ा के कैलाश आश्रम पहुंचेगा। इसके उपरांत तीन अप्रैल को हमीरपुर और चार अप्रैल को ऊना के श्रद्धालुओं को महादेव के साक्षात दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होगा। यात्रा का अगला पड़ाव पांच अप्रैल को छोटी काशी मंडी में होगा, जिसके बाद छह अप्रैल को देव घाटी कुल्लू में विशेष आयोजन किए जाएंगे। एक दिन के विश्राम के बाद, यह पावन सफर आठ अप्रैल को सोलन और नौ अप्रैल को प्रदेश की राजधानी शिमला में भव्य समागमों के साथ आगे बढ़ेगा। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी आध्यात्मिक यात्रा का विधिवत समापन 10 अप्रैल को नाहन में किया जाएगा।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक

आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का माध्यम है। चंबा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों की आस्था अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति अटूट है। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्र कल्याण का संकल्प भी लिया। इस आयोजन के साथ ही चंबा एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है। 

लोक गीतों में वर्णित शिव के पहले 'डेरे' का साक्षी बना चौगान

इस आयोजन ने चंबा की प्राचीन लोक मान्यताओं को भी जीवंत कर दिया। चंबा के प्रसिद्ध लोक भजन शिव कैलाशों के वासी में जिस आध्यात्मिक वैभव का वर्णन है, उसकी झलक बुधवार को चौगान में साक्षात देखने को मिली। मान्यता है कि जब भगवान शिव कैलाश (मणिमहेश) की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उन्होंने धरती पर अपने कुछ खास स्थानों पर डेरे (पड़ाव) डाले थे। महादेव का सबसे पहला पड़ाव चंबा का यही ऐतिहासिक चौगान था और दूसरा पड़ाव भरमौर। आज हजारों वर्षों बाद उसी चौगान में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेषों का पहुंचना एक अद्भुत संयोग है, जिसने श्रद्धालुओं की आस्था को और भी प्रगाढ़ कर दिया है।

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